नियमित योग का अभ्यास शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को कई गुना बढ़ा देता है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी अब यह मानने लगा है कि दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय यदि योग को जीवन का हिस्सा बनाया जाए, तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। योग हमारे शरीर के सभी आंतरिक अंगों, जैसे—हृदय, फेफड़े, लिवर, और किडनी की कार्यप्रणाली में सुधार करता है।
जब हम विभिन्न योगासन (जैसे भुजंगासन, पश्चिमोत्तानासन या धनुरासन) करते हैं, तो शरीर के अंगों की गहरी स्ट्रेचिंग और मसाज होती है। इससे पूरे शरीर में रक्त का संचार (Blood Circulation) सुधरता है और हर कोशिका तक ऑक्सीजन समृद्ध रक्त पहुँचता है। इसके साथ ही, योग हमारे लसीका तंत्र (Lymphatic System) को सक्रिय करता है, जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने के लिए जिम्मेदार होता है। जब टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, तो बीमारियों से लड़ने वाले श्वेत रक्त कण (WBC) अधिक प्रभावी ढंग से काम करते हैं।
फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में 'कपालभाति' और 'भस्त्रिका' प्राणायाम बेहद मददगार हैं। ये श्वसन तंत्र को साफ करते हैं, जिससे अस्थमा, एलर्जी और सर्दी-खांसी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। इसके अलावा, योग पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है, जिससे खाया हुआ भोजन सही से पचता है और शरीर को पूरे पोषक तत्व मिलते हैं। एक मजबूत पाचन तंत्र ही मजबूत इम्युनिटी की नींव है। इसलिए, योग किसी सप्लीमेंट या टॉनिक से कहीं बेहतर है, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को दीर्घायु और निरोगी बनाता है।